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निर्माण कॉन्ट्रैक्ट · ग्रेटर नोएडा · YEIDA

टर्नकी बनाम लेबर बनाम आइटम-रेट: घर का कौन सा ठेका सही?

सीधा जवाब: पूरा ठेका (टर्नकी) में एक ही कंपनी पूरा काम — डिज़ाइन, मटेरियल, मज़दूरी, अप्रूवल, फिनिशिंग — एक तय दाम में करती है, तो जोखिम सबसे कम और दाम पहले से पक्का। लेबर ठेका कागज़ पर सस्ता है (सिर्फ़ मज़दूरी) पर मटेरियल आप खरीदते हैं और बर्बादी-दाम-निगरानी का बोझ आप पर। आइटम-रेट में नापी हुई मात्रा का भुगतान — पारदर्शी पर कुल दाम तय नहीं। ज़्यादातर पहली बार और NRI मालिकों के लिए फिक्स्ड-प्राइस टर्नकी सबसे सुरक्षित है।

अपडेट: जून 2026

तीनों ठेके का असल मतलब

  • 1 · पूरा ठेका (टर्नकी, फिक्स्ड-प्राइस)

    एक बिल्डर खाली प्लॉट से बना-बनाया घर एक तय दाम में देता है — डिज़ाइन, नक्शा पास, मटेरियल, ढांचा, फिनिशिंग, हैंडओवर। लिखित स्कोप, milestone पर भुगतान। सबसे कम जोखिम, दाम पक्का। Vidastu इसी मॉडल पर बनाता है।

  • 2 · लेबर ठेका (सिर्फ़ मज़दूरी)

    आप कॉन्ट्रैक्टर को सिर्फ़ मज़दूरी का प्रति वर्ग फुट रेट देते हैं; सीमेंट, सरिया, टाइल — सब आप खरीदते हैं। ऊपरी दाम कम, पर मटेरियल खरीदारी, बर्बादी, चोरी, क्वालिटी और दाम बढ़ने का जोखिम आप पर — और आपको साइट पर मौजूद रहना पड़ता है।

  • 3 · आइटम-रेट (नाप वाला)

    हर काम का तय यूनिट रेट (प्रति वर्ग फुट प्लास्टर, प्रति घन मीटर कंक्रीट) और आप असल नापी हुई मात्रा का भुगतान करते हैं। लाइन-दर-लाइन पारदर्शी, पर कुल दाम तय नहीं और साझा नाप-जोख ज़रूरी।

तीनों की तुलना — एक नज़र में

तुलना — किसी भी बिल्डर को परखने के लिए (किसी फर्म के असल रेट का दावा नहीं)। Vidastu हर घर का दाम फ्री साइट विज़िट के बाद एक बाइंडिंग, आइटमवार फिक्स्ड कोटेशन में देता है।
क्या मायने रखता हैपूरा ठेका (टर्नकी)लेबर ठेकाआइटम-रेट
मटेरियल कौन खरीदता हैबिल्डरआपआमतौर पर बिल्डर, रेट पर बिल
साइट कौन सँभालता हैबिल्डर (एक टीम)आप + लेबर कॉन्ट्रैक्टरबिल्डर, आपकी जाँच के साथ
कुल दाम पक्का?हाँ — एक तय दाममज़दूरी पक्की, मटेरियल नहींनहीं — मात्रा से बदलता
मालिक का जोखिम/मेहनतसबसे कमसबसे ज़्यादामध्यम-ज़्यादा
किसके लिए सहीपहली बार व NRI; जिन्हें पक्का दाम चाहिएजो रोज़ साइट पर रहकर मटेरियल सँभाल सकेंजिन्हें लाइन-वार पारदर्शिता चाहिए

"लेबर ठेका सबसे सस्ता है ना?" — पूरा हिसाब लगाने पर नहीं

लेबर ठेका ऊपरी दाम में जीतता है क्योंकि उसमें मटेरियल छूट जाता है — और मटेरियल ही घर की बड़ी लागत है। जैसे ही आप मटेरियल जोड़ते हैं, साथ में आती है बर्बादी (ज़्यादा ऑर्डर, टूट-फूट, चोरी), 10–16 महीने में सीमेंट-सरिया के दाम का उतार-चढ़ाव, हर डिलीवरी जाँचने का समय, और जब मज़दूरी-मटेरियल एक ज़िम्मेदार पक्ष से तालमेल में न हों तो रीवर्क। इन सबके बाद फिक्स्ड-प्राइस टर्नकी अक्सर बराबर या कम कुल लागत पर बैठता है — फ़र्क़ यह कि टर्नकी का दाम पहले दिन से पक्का था।

तुलना बने-बनाए घर की कुल लागत से करें, ऊपरी रेट से नहीं। सबसे सस्ता दिखने वाला ठेका शायद ही सबसे सस्ता घर हो।

घर की लागत किन बातों पर निर्भर करती है — देखें हिंदी खर्चा गाइड 2026 →, और भरोसेमंद निर्माणकर्ता चुनने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे निर्माणकर्ता पेज →

Vidastu कैसे बनाता है — पूरा ठेका, एक दाम, एक वारंटी

Vidastu पूरा ठेका (टर्नकी) मॉडल पर बनाता है क्योंकि यही बाकी दोनों का जोखिम मालिक से हटाता है। फ्री साइट विज़िट के बाद एक बाइंडिंग, आइटमवार फिक्स्ड कोटेशन (GST सहित, न एकमुश्त, न छिपे खर्च), milestone-linked भुगतान, घर में ही GNIDA/YEIDA नक्शा पास, अपने प्लॉट से रोज़ फोटो प्रूफ, और लिखित 10 साल की स्ट्रक्चरल वारंटी (Luxe पर 15)। फिनिश चुनें — Essential / Premium / Luxe — बाकी एक ज़िम्मेदार टीम पर।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

टर्नकी, लेबर ठेका और आइटम-रेट में क्या फर्क है?
पूरा ठेका (टर्नकी) = एक बिल्डर, एक तय दाम, सबसे कम जोखिम। लेबर ठेका = आप प्रति वर्ग फुट सिर्फ़ मज़दूरी देते हैं और मटेरियल खुद खरीदते हैं (बर्बादी+दाम+निगरानी का जोखिम आप पर)। आइटम-रेट = हर काम के तय यूनिट रेट पर असल नापी मात्रा का भुगतान, कुल दाम तय नहीं।
सबसे सस्ता कौन सा है?
लेबर ठेका सस्ता दिखता है (मटेरियल बाहर), पर बर्बादी, दाम बढ़ना, समय और रीवर्क जोड़ने पर कुल लागत अक्सर टर्नकी जितनी या ज़्यादा — और टर्नकी का दाम पहले दिन से पक्का। बने-बनाए घर की लागत से तुलना करें।
पहली बार या NRI के लिए सबसे सुरक्षित कौन सा है?
पूरा ठेका (टर्नकी) — दाम, समय और ज़िम्मेदारी एक कंपनी के पास एक लिखित कॉन्ट्रैक्ट में। NRI रिमोट-बिल्ड →
आइटम-रेट (नाप वाला) क्या होता है?
हर काम का तय यूनिट रेट और आप असल नापी मात्रा का भुगतान करते हैं। पारदर्शी, पर कुल दाम पहले से तय नहीं और साझा नाप-जोख ज़रूरी।
क्या बीच में लेबर से टर्नकी पर बदल सकते हैं?
संभव पर पेचीदा — नया बिल्डर अधूरे ढांचे का दोबारा सर्वे, ज़िम्मेदारी और री-प्राइस करता है, जो टर्नकी से शुरू करने से अक्सर महंगा। शुरू से मॉडल चुनें; पहले टर्नकी कोटेशन लेकर पक्का बेसलाइन रखें।
झगड़े से कैसे बचें?
लिखित कॉन्ट्रैक्ट में स्कोप, मटेरियल ब्रांड/ग्रेड, milestone भुगतान, समय-सीमा, वारंटी; भुगतान पूरे चरणों से जुड़ा (बड़ा एडवांस कभी नहीं); लेबर/आइटम-रेट में नाप का तरीका पहले तय। रजिस्टर्ड कंपनी (GST, CIN, UP-RERA) = जवाबदेही।

शुरू करने से पहले पक्का दाम चाहिए?

WhatsApp पर अपना सेक्टर और प्लॉट साइज़ भेजें। फ्री साइट विज़िट के बाद एक बाइंडिंग, आइटमवार टर्नकी कोटेशन — न रेट-कार्ड, न छिपे खर्च, milestone भुगतान, 10 साल स्ट्रक्चरल वारंटी। जो कोटेशन देता है, वही बनाता है।